शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

तुम


वो आख़िरी मुलाकात थी हमारी। उसने मुझे गले लगाने से इन्कार कर दिया था और बस मुस्कुरा कर चला गया।
मैं उसे दूर तक जाता देखती रही, उसकी जल्द वापसी की उम्मीद के साथ....... दूर जाते- जाते वो दिखना बंद हो गया।
उसका दिखना जितना धुंधला होता जा रहा था, यादें उतनी गाढ़ी हो रही थीं। मैं लिखने लगी, कुछ कविता जैसा........ पहली ही बार लिखा था मैंने........पहली ही बार कुछ चुभा था दिल में......

फिर, बहुत- बहुत दिन बीत जाने के बाद एक दिन अचानक उसका फ़ोन आया,
-कौन? मैंने जानकर अनजान बनने का नाकाम नाटक किया।

-तुम्हारे घर के नीचे खड़ा हूँ, उसने कहा।

-मैंने घर बदल दिया है

-तो अपने पुराने पते पर आ जाओ जल्दी, कहकर उसने फ़ोन काट दिया.......

  मैं भागी- भागी वहां पहुंच गई......

वो ठीक उसी जगह खड़ा था, जहाँ हमने पहली बार एक दूसरे का हाथ पकड़ा था।
उसने बाहें फैलाईं और मैं दौड़कर उससे लिपट गयी।
मैं घण्टो उसके गले लगी रही और सारी व्यथाएँ आंखों से झरती रहीं।

सोमवार, 5 नवंबर 2018

कहानियाँ

जब हम किसी को जानते नहीं, किसी प्रकार की कोई जान पहचान नहीं होती, तो वो कितना सामान्य व्यक्ति लगता है, और जैसे ही हम उसे जान लेते हैं तो वह असामान्य हो जाता है। वह साधारण, अति साधारण, विशिष्ट या फिर अति विशिष्ट हो जाता है। जो हमारे लिए अभी तक अजनबी था वो अचानक ही अति विशिष्ट हो जाता है। इस अनजाने से विशिष्ट तक के बीच के सफ़र को ही कहानी कहते हैं। हर चेहरे के पीछे कोई न कोई कहानी होती है, उस कहानी को जान लेने के बाद वो व्यक्ति अनजाना नहीं रह जाता, उसकी एक पहचान हो जाती है हमारे पास, क्यूंकि अब उसकी कहानी है हमारे पास। कितनी अनकही, अनसुनी कहानियां होती हैं हमारे चारों ओर, कितनी ही हम सुन चुके होते हैं, कभी-कभी कोई कहानी किसी अन्य कहानी से मिलती जुलती प्रतीत होती है तो कभी कोई कहानी हमें हतप्रभ कर देती है, कभी कोई कहानी देर तक दिमागी उलझन बनी रहती है तो कभी कोई दिल को छू लेने वाली होती है। सारी कहानियों में जो एक बात सबमें होती है वो ये कि सारी कहानियां अविस्मरणीय होती हैं, एक व्यक्ति को जान लेने के बाद वो अनजान नहीं हो सकता, उसे देखते ही हमें उसकी कहानी याद हो आती है। चारो तरफ बिखरे लोग, चारो तरफ बिखरी कहानियाँ…….

रविवार, 28 अक्टूबर 2018

मुक्ति

तुम्हें जाना था, तो कहकर भी तो जा सकते थे? बस एक अलविदा की ही तो चाह थी। ऐसा कुछ ज़्यादा तो नहीं चाहा था? मैंने तो खुद रास्ता बना दिया था, तैयारी कर दी थी तुम्हारे जाने की, तुमसे अलविदा भी क्यूँ न कहा गया? अलविदा न कहकर जाने वालों का इंतज़ार रह जाता है हमेशा..... और इंतज़ार से बढ़कर भी सज़ा क्या हो सकती है भला? इंतज़ार सालता रहता है हर पल....... हम घुलते रहते हैं तुम्हारे इंतज़ार में कि बस एक दिन लौट आओगे और सीने से लगा लोगे हमें कसकर और उस एक पल में सारी यातनायें, सारे कष्ट मिट्टी हो जाएंगे। इंतज़ार की अंधेरी घड़ी में बस तुम्हारे आने की दुआ जिलाये रखती है। सुनो! लौट कर आना ज़रूर एक बार, बस अलविदा कहने...... और कहना बस यही एक आखिरी मुलाकात है, और ये आख़िरी अलविदा, कि अब नहीं करना होगा तुम्हें इंतज़ार, जाओ मुक्त हो जाओ।

गुरुवार, 4 अक्टूबर 2018

यात्रा

किसी किताब के पूरा होने पर रीता हुआ सा महसूस होता है। किताब को पढ़ते हुए हम कई दिनों तक, कई बार महीनों भी यात्रा पर रहते हैं। कई बार हम एक साथ कई किताबें पढ़ रहे होते हैं, लेकिन उनमें कोई एक किताब प्राथमिकता होती है, जिस यात्रा को हम सर्वप्रथम पूरा करना चाहते हैं। यात्रा पूरी होने पर हम कुछ अलग अनुभव करते हैं, कुछ एकदम ही नया, इतना नया कि प्रथम ही प्रतीत होता है हर बार।
मैं हमेशा कोई उपन्यास या कहानी संग्रह पूरा होने पर, कम से कम दो दिन कविताएं पढ़ती हूँ, यह किसी फिल्म के दौरान एक गाने जैसा होता है।
किताबों का संसार अनोखा है और मैं इसकी नौसिखिया यात्री, पर अपने इस जीवन में मैं इस संसार के जितने हो सके शहर, गाँव, कस्बे इत्यादि घूम लेना चाहती हूँ, जितने हो सके रास्तों से गुजरते हुए उन्हें अपनी स्मृति में संजो लेना चाहती हूँ।❤️

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

अभिव्यक्ति

तुम्हारा मिलना, जैसे स्याह रात बारिश के बाद धूप खिलना।

गर्म हथेलियाँ तुम्हारी धीरे से पकड़ना और रख देना कांधे पे सर, जैसे गर्माहट का सब गीले को सहलाना।

हाथ थामे बैठना, मुस्कुराना बेवजह, अंतर तक तुम्हारे शब्द महसूसना, जैसे किरणों से नदी के पानी का सुनहला होना।

समय का बीतते जाना, सांसो का घुलते जाना, ज़िद मेरी तुम्हें थोड़ी और देर रोकना, जैसे तूफान के बाद पक्षियों का कोटर से बाहर आना।

पिछली से अबकी मुलाकात के बीच का सब कहना बताना, जैसे धुले हुए पत्तों का चमकना।

तुम्हें देखना, बस देखते जाना, और अगली मुलाकात के लिए पूछना, जैसे छुटपुट बादलों का आकाश में नज़र आना।

बीते वक़्त को याद करना, तुम्हारी यादों में सुख महसूसना, जैसे बारिश का हर छोटे बड़े गड्ढे को भर देना।

गुरुवार, 26 जुलाई 2018

जीवन उत्सव

मैं बहुत खुश हूँ ज़िन्दगी से। ऐसा लगता है मुझे और कुछ नहीं चाहिए। सचमुच बहुत खुश हूँ। मैं जैसे चाहती थी, ठीक वैसे ही अपनी ज़िन्दगी जी रही हूँ। जैसी कल्पना की थी, हूबहू  वैसी ही। अकेलेपन का उत्सव मनाते हुए, अपना ख़याल खुद रखते हुए, अपने घर को, अपने पसन्दीदा रंगों से, अपने लिए सजाते हुए। और ईश्वर बहुत दयालु हैं। इतने के बाद रोज़ एक खूबसूरत तोहफ़ा देते हैं मुझे। रोज़ ही, जैसे नींद खुलते ही बारिश, जैसे तुम्हारा होना मेरे ख्यालों में। सबकुछ कितना खूबसूरत है। मुझे कोई शिकायत नहीं है किसी से, मैंने सबको माफ़ कर दिया है, जिसने भी कभी मेरा दिल दुखाया है। मैं अब खुश हूँ, इतनी कि बाँट सकती हूँ खुशियाँ। अपने उत्सव में शामिल कर सकती हूँ हर किसी को जो प्यार करता है मुझसे। और तुम? तुम्हारी जगह हमेशा ख़ास रहेगी। सिर्फ़ आख़िरी नहीं, मेरी किताब के हर पन्ने पर तुम्हारा नाम होगा।

मंगलवार, 26 जून 2018

प्रेम-सम्बन्ध

मुझे प्यार करने की हैसियत है तुम्हारी? कर पाओगे वैसा प्यार, जैसा मुझे है अपने आप से
या तुमसे।  वो प्यार जिसमे समर्पण और जुनून में कोई अंतर नहीं है, जहाँ समर्पण कोमल नहीं जूनून की तरह उत्तेजक भाव है। क्या करते हो खुद से प्रेम? क्यूँकि जब खुद प्रेम से परिपूर्ण होगे तभी दे सकोगे किसी को प्रेम।
मुझे प्रेम करने की एकमात्र शर्त प्रेम है। पहली और आखिरी शर्त। असीमित प्रेम, ब्रह्माण्ड की किसी भी और चीज़ के पहले और बाद मैं हूँ तुम्हारे लिए, दे पाओगे ये एहसास?
हाँ! कह सकते हो मुझे स्वार्थी, मांग है ये मेरी तुमसे, कहा है तुमने क्यूँकि कि तुम्हे प्रेम है मुझसे। प्रेम की उस पराकाष्ठा तक पहुँच पाओगे जहाँ एकाकार महसूसा जा सकता है। जहाँ अपने और मुझमे कोई अंतर न कर पाओ तुम, शरीर का होना न होना जहाँ महत्वपूर्ण नहीं रह जाता कि जब अपना हाथ चूमो तुम तो एहसास मुझ तक पहुंचे, अपने हाथ अपने गालों पे रखो तो मुझे तुम्हारा स्पर्श महसूस हो। दे पाओगे ये एहसास? जूनून की इंटेसिटी से कर पाओगे समर्पण? यदि हाँ, तो ही कहना की प्रेम करते हो मुझसे, क्यूँकि प्रेम हमेशा एकतरफा होता है और मैं अपने प्रेम में पूर्ण हूँ। याद रखो प्रेम का एक चरण अवसाद भी है, उसे जिए बिना प्रेम पूर्ण नहीं होता, तो यदि अवसाद जीने की और एहसास देने की क्षमता है तो इस प्रेम को सम्बन्ध का रूप देने की शुरुआत की जा सकती है।