मैं बहुत खुश हूँ ज़िन्दगी से। ऐसा लगता है मुझे और कुछ नहीं चाहिए। सचमुच बहुत खुश हूँ। मैं जैसे चाहती थी, ठीक वैसे ही अपनी ज़िन्दगी जी रही हूँ। जैसी कल्पना की थी, हूबहू वैसी ही। अकेलेपन का उत्सव मनाते हुए, अपना ख़याल खुद रखते हुए, अपने घर को, अपने पसन्दीदा रंगों से, अपने लिए सजाते हुए। और ईश्वर बहुत दयालु हैं। इतने के बाद रोज़ एक खूबसूरत तोहफ़ा देते हैं मुझे। रोज़ ही, जैसे नींद खुलते ही बारिश, जैसे तुम्हारा होना मेरे ख्यालों में। सबकुछ कितना खूबसूरत है। मुझे कोई शिकायत नहीं है किसी से, मैंने सबको माफ़ कर दिया है, जिसने भी कभी मेरा दिल दुखाया है। मैं अब खुश हूँ, इतनी कि बाँट सकती हूँ खुशियाँ। अपने उत्सव में शामिल कर सकती हूँ हर किसी को जो प्यार करता है मुझसे। और तुम? तुम्हारी जगह हमेशा ख़ास रहेगी। सिर्फ़ आख़िरी नहीं, मेरी किताब के हर पन्ने पर तुम्हारा नाम होगा।