जब हम किसी को जानते नहीं, किसी प्रकार की कोई जान पहचान नहीं होती, तो वो कितना सामान्य व्यक्ति लगता है, और जैसे ही हम उसे जान लेते हैं तो वह असामान्य हो जाता है। वह साधारण, अति साधारण, विशिष्ट या फिर अति विशिष्ट हो जाता है। जो हमारे लिए अभी तक अजनबी था वो अचानक ही अति विशिष्ट हो जाता है। इस अनजाने से विशिष्ट तक के बीच के सफ़र को ही कहानी कहते हैं। हर चेहरे के पीछे कोई न कोई कहानी होती है, उस कहानी को जान लेने के बाद वो व्यक्ति अनजाना नहीं रह जाता, उसकी एक पहचान हो जाती है हमारे पास, क्यूंकि अब उसकी कहानी है हमारे पास। कितनी अनकही, अनसुनी कहानियां होती हैं हमारे चारों ओर, कितनी ही हम सुन चुके होते हैं, कभी-कभी कोई कहानी किसी अन्य कहानी से मिलती जुलती प्रतीत होती है तो कभी कोई कहानी हमें हतप्रभ कर देती है, कभी कोई कहानी देर तक दिमागी उलझन बनी रहती है तो कभी कोई दिल को छू लेने वाली होती है। सारी कहानियों में जो एक बात सबमें होती है वो ये कि सारी कहानियां अविस्मरणीय होती हैं, एक व्यक्ति को जान लेने के बाद वो अनजान नहीं हो सकता, उसे देखते ही हमें उसकी कहानी याद हो आती है। चारो तरफ बिखरे लोग, चारो तरफ बिखरी कहानियाँ…….
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