मंगलवार, 26 जून 2018

प्रेम-सम्बन्ध

मुझे प्यार करने की हैसियत है तुम्हारी? कर पाओगे वैसा प्यार, जैसा मुझे है अपने आप से
या तुमसे।  वो प्यार जिसमे समर्पण और जुनून में कोई अंतर नहीं है, जहाँ समर्पण कोमल नहीं जूनून की तरह उत्तेजक भाव है। क्या करते हो खुद से प्रेम? क्यूँकि जब खुद प्रेम से परिपूर्ण होगे तभी दे सकोगे किसी को प्रेम।
मुझे प्रेम करने की एकमात्र शर्त प्रेम है। पहली और आखिरी शर्त। असीमित प्रेम, ब्रह्माण्ड की किसी भी और चीज़ के पहले और बाद मैं हूँ तुम्हारे लिए, दे पाओगे ये एहसास?
हाँ! कह सकते हो मुझे स्वार्थी, मांग है ये मेरी तुमसे, कहा है तुमने क्यूँकि कि तुम्हे प्रेम है मुझसे। प्रेम की उस पराकाष्ठा तक पहुँच पाओगे जहाँ एकाकार महसूसा जा सकता है। जहाँ अपने और मुझमे कोई अंतर न कर पाओ तुम, शरीर का होना न होना जहाँ महत्वपूर्ण नहीं रह जाता कि जब अपना हाथ चूमो तुम तो एहसास मुझ तक पहुंचे, अपने हाथ अपने गालों पे रखो तो मुझे तुम्हारा स्पर्श महसूस हो। दे पाओगे ये एहसास? जूनून की इंटेसिटी से कर पाओगे समर्पण? यदि हाँ, तो ही कहना की प्रेम करते हो मुझसे, क्यूँकि प्रेम हमेशा एकतरफा होता है और मैं अपने प्रेम में पूर्ण हूँ। याद रखो प्रेम का एक चरण अवसाद भी है, उसे जिए बिना प्रेम पूर्ण नहीं होता, तो यदि अवसाद जीने की और एहसास देने की क्षमता है तो इस प्रेम को सम्बन्ध का रूप देने की शुरुआत की जा सकती है।

2 टिप्‍पणियां: